Thursday, October 10, 2019

भारत में लगी सालों पहले चुराई गई मूर्तियों की प्रदर्शनी

Narendra Modi brought back statues worth billions of rupees stolen


शाही शानो शौकत भला कैसी होगी? यह सवाल अक्सर जेहन में आता है। उनका रहन-सहन कैसा होगा? राजदरबार कैसे लगता होगा? इन सभी सवालों के जवाब पुराना किला के नए खुले संग्रहालय में मिलेंगे। यहां शाही घराने की शानो शौकत, शाही पुरुषों का लिबास, राजदरबार, शिविर समेत राजदरबार में संगीत का आनंद लेते राजकुमार की एक से बढ़कर एक हाथी दांत पर बनी 17वीं-19वीं सदी की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई है। इसके अलावा भी दूसरी सदी से लेकर 19वीं सदी के पुरावशेष प्रदर्शित किए गए है। ये पुरावशेष चोरी या फिर किसी अन्य कारणों से देश से बाहर गए थे। जिसे सीबीआई समेत अन्य जांच एजेंसियों व पीएम नरेंद्र मोदी की मदद से वापस लाया गया है।

शाही कलाकृतियां
संग्रहालय में हाथी दांत श्रेणी में कई कलाकृतियां प्रदर्शित है। संग्रहालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यहां हाथी दांत पर बनी करीब 20 से ज्यादा कलाकृतियां प्रदर्शित है। इसमें उत्तर भारत के एक दरबार का दृश्य है, जिसमें राजकुमार मौजूद है। जबकि शिविर दर्शाती कलाकृतियां भी है।17वीं शती की राजकुमार को संत द्वारा उपदेश देते समय की कलाकृति भी मौजूद है। राजदरबार में संगीत का आनंद उठाते राजकुमार, शिविर में बच्चे, जानवर, शतरंज खेलते राजकुमार समेत शाही पुरुष के करीब छह रुपचित्र भी है। पदाधिकारी की मानें तो इन कलाकृतियों से उस समय के राज घराने के बारे में काफी जानकारी मिलती है। हाथी दांत पर ही बनी 17वीं सदी की देवी की प्रतिमा, ईसाई संत, मदर मैरी, पंचशीर्ष देवता, स्त्री प्रतिमा, राजस्थानी लघुचित्र, कमल चित्र भी प्रदर्शित है।



ये हैं खास आकर्षण
संग्रहालय में प्रवेश करते ही सबसे पहले पुरावशेषों के अवैध व्यापार के बारे में बताया गया है। किस तरह इन पुरावशेषों को बरामद किया गया, यह भी बताया गया है। इसके बाद बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से बनी सिंह प्र्रस्तर, गज व्याल एवं 9वीं शती का द्वारपाल प्रदर्शित है। इसके बाद मौर्यकालीन मातृदेवी की प्रतिमा प्रदर्शित है। पदाधिकारी ने बताया कि प्राचीन काल से ही मातृदेवी को विभिन्न संस्कृतियों एवं सभ्यताओं द्वारा दर्शाया गया है तथा प्रकृति, मातृत्व, सृजन, विध्वंस का मूर्त प्रतीक माना गया है। भारतीय कला में मातृ देवी को प्रतिमा के रुप में दर्शाने का चलन सिंधु घाटी सभ्यता के समय से लेकर मध्य काल तक प्रचलित रहा है। मौयकालीन मातृदेवी की यहां प्रदर्शित प्रतिमा हार, कुंडल, चूड़ियों आदि के अलंकरण है। जिसका शिरोभाग भी अलंकरण युक्त है। यह प्रतिमा न्यूयार्क स्थित होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा आर्ट आफ पास्ट नामक कला वीथिका के मालिक सुभाष कपूर के गोदाम में बरामद की गई थी। जिसे 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूयार्य दौरे में प्रयुुक्त हवाई जहाज द्वारा वापस लाया गया था। यहीं पास ही चोल कालीन श्रीदेवी की प्रतिमा भी प्रदर्शित है। संगमरमर की बनी 14वीं शती की ब्रम्हा ब्रम्हाणी की मूर्ति दर्शकों को ठहरने के लिए बाध्य कर देती है। भगवान विष्णु की कई प्रतिमाएं प्रदर्शित है जो अनंतशायी मुद्रा, वराह, चतुर्भुज बैकुंठ की बलुआ प्रस्तर से बनी प्रतिमाएं हैं। उत्तर प्रदेश के भीतरगांव से चुराई गई 4-5वीं सदी की गण की मृणमय प्रतिमा भी प्रदर्शित है। इसे संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित लास एंजलिस काउंटी संग्रहालय ने स्वेच्छा से लौटाया है। यह वहां कैसे पहुंची यह पता नहीं चल सका है। संग्रहालय में ताम्र निर्मित वस्तुएं, भारतीय सिक्के, पार्वती की प्रतिमा, नटराज की प्रतिमा, तांबे के औजार प्रदर्शित है।

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