Friday, September 13, 2019

मन में है दिल्ली

Man me hain delhi 
सुबह सूरज की किरणों से जामा मस्जिद नहा रहा है। हाथ ठेला बिना शोर के चले जा रहा है। कनॉट प्लेस सर्किल पर आइसक्रीम खाते लोग हैं तो कहीं किसी वाटरकलर पेंटिंग में ऑटो का इंतजार करते लोग। पुरानी दिल्ली की संकरी गलियों में साइकिल पर पैडल मारता पेपरवाला हो या फिर चांदनी चौक की पुरानी हवेली का भव्य दरवाजा। पेंटिंग में ये नजारे मानों जीवंत हो उठे हैं। ये न सिर्फ आंखों को सुहाते हैं ब्लकि अपने दामन में किस्से कहानियों का संसार समेटे हैं। जो हर दिल अजीज है। दिल्ली की दिलकश खूबसूरती को कलाकृतियों के जरिए प्रस्तुत कर रहे हैं कृष्णेंदु चटर्जी। जिनकी कलाकृतियों की प्रदर्शनी इंडिया हैबिटेट सेंटर में चल रही है।
https://en.wikipedia.org/wiki/Jhandewalan_Temple

दिलवालों की दिल्ली
कृष्णेंदु कहते हैं कि इंडिया हैबिटेट सेंटर में उनकी 30 कलाकृतियां प्रदशि्रत है। अधिकतर कलाकृतियां पुरानी दिल्ली पर आधारित है जबकि कनॉट प्लेस, संसद भवन समेत लुटियन दिल्ली आधारित भी कलाकृतियां है। इन कलाकृतियों की खासियत वाटर कलर है। बकौल कृष्णेंदु वाटरकलर पेंटिंग के लिए तकनीकी रुप से दक्ष एवं लाइट एंड शेड का विशेषज्ञ होना चाहिए। कलाकृति बनाने के दौरान उन्होंने पूरी कोशिश की है कि कलाकृति दिल्लीवालों के दिल में बस जाए। इसमें वो काफी हद तक सफल भी रहे हैं। पुरानी दिल्ली की संकरी गलियों में किस तरह जिंदगी हंसती मुस्कुराती है, इसकी झलक कलाकृतियों में मिलती है। गलियों में साइकिल लेकर चलता पेपरवाला, बिजली के खंभों से लिपटे-झुलते बिजली के तार, गलियों में ही रखे पुराने स्कूटर, कहीं किसी हवेली का पुराना मजबूत दरवाजा, जिसकी नक्काशी दिल को खुश कर देती है। पुरानी दिल्ली की गलियों में सिर पर सामान उठाए जाता कर्मचारी, गलियों में ही खड़े हाथ ठेला गाड़ियां। जामा मस्जिद की खूबसूरती। कनॉट प्लेस का खुलापन। ये सब दर्शक देखकर वाह वाह कर उठते हैं। झंडेवालान का विश्व प्रसिद्ध हनुमान मंदिर आधारित कलाकृति भी शानदार है। सामने से वाहनों का गुजरना, क्रेन का खड़ा होना, राहगीरों का फुटपाथ पर चलना सरीखे दृश्य इसे जीवंत बना देते हैं।

दिल्ली दिल है
फोटोग्राफर एवं कलाकार कृष्णेंदु कहते है कि दिल्ली मेरे मन में हमेशा रहा है, रहा था और रहेगा। कलाकार की नजर से देखें तो दिल्ली में सब्जेक्ट बहुत ज्यादा है। मेरी दिल्ली आधारित पांच प्रदर्शनी पहले भी लग चुकी है। गत वर्ष यमुना नदी पर प्रदर्शनी लगी थी, जिसे काफी सराहा गया। प्रदर्शनी, दूर्गा पूजा के बाद मूर्तियों के विसर्जन के बाद के हालात दिखाया गया था। इसके पहले कि प्रदर्शनी फोटो आधारित थी। इस बार पहली बार वाटरकलर प्रदर्शनी आयोजित की गई है। जिसमें दिल्ली की खूबसूरती उभारने की कोशिश की गई है।

वाटर कलर ही क्यों
कृष्णेंदु कहते हैं कि वाटर कलर दरअसल एक फन होता है। यह एक एडिक्ट की तरह होता है। आयल पेंटिंग के मुकाबले वाटर कलर में टाइम कम लगता है, रिजल्ट तत्काल मिल जाता है। हालांकि इसमें तकनीक महत्वपूर्ण है। जिन जगहों की मैंने कलाकृति बनाई है, उन जगहों पर अक्सर जाना हुआ है। रात में मैं बैठकर पेंटिंग बनाता था। इसे बनाने में दो से चार घंटे तक लगते थे।



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