Friday, August 9, 2019

चिट्ठी आयी है...

चिट्ठी आयी है..पीले पोस्टकार्ड पर अक्षर उभरे हैं। कई पोस्टकार्ड पर लिखते समय आंसूओं की बूंद टपकने से अक्षर धुंधले हो चुुके हैं। पोस्टकार्ड, जो सैनिकों की वीरता के किस्से से भरे है। हर चिट्ठी शहादत की कहानियां समेटे हैं। अपनों को खोने का गम भी है और देश के लिए बलिदान होने का गर्व भी। इन चिट्ठियों ने सैकड़ों मीलों का सफर तय किया है। भारत के लगभग हर राज्य से आयी हैं। इनमें झुग्गी बस्तियों के बच्चों की भावनाएं भी है और वरिष्ठ कलाकारों की भावुक सोच भी। तभी तो ललित कला अकादमी में लगी पोस्टकार्ड प्रदर्शनी में इन चिट्ठयों को देखने, पढ़ने के लिए दिल्ली समेत एनसीआर से लोग खींचे चले आ रहे हैं। 300 से भी ज्यादा वरिष्ठ कलाकारों की 498 चिट्ठीयों में देशभक्ति की भावना कूटकर भरी है। करीब पांच महीने की मेहनत और लगन से तैयार इस प्रदर्शनी की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी तारीफ कर चुुके हैं।

हर राज्य का प्रतिनिधित्व
क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना कहते हैं कि फरवरी महीने में हमने इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। जिसका नाम था भारतीय सेना। हम सेना को केंद्र में रखकर कुछ ऐसा करना चाहते थे जो लोग हमेशा याद रखे। फिर, चिट्ठी का ख्याल आया। क्यों कि सेना और चिट्ठी का अटूट नाता है। इसी बहाने इंटरनेट की लत से जूझ रही युवा पीढ़ी को लगभग विलुुप्त होती जा रही चिट्ठियों संग दोस्ती का अवसर मिलेगा। बस यही सोचकर हमने पहले पहले कुछ वरिष्ठ कलाकारों को सेना के जवानों को समर्पित पोस्टकार्ड लिखने को कहा। इसके बाद हमने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर लोगों से पोस्टकार्ड भेजने को कहा। बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। हम लखनऊ की झुग्गी बस्ती में भी गए। वहां बच्चों को पोस्टकार्ड दिया और उनसे अपनी भावनाओं का इजहार करने को कहा। उन्होंने इतनी खूबसूरत ड्राइंग के साथ जो संदेश लिखे वो दिल को छू जाने वाले हैं। यहां तमिलनाडू, असम, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत भारत के हर राज्यों से भेजी गई पोस्टकार्ड प्रदर्शित है।

वरिष्ठ कलाकारों ने लिखे पोस्टकार्ड
बकौल भूपेंद्र इसमें कवि, चित्रकार, काटूनिस्ट, फोटोग्राफर समेत विभिन्न कला क्षेत्रों के वरिष्ठों द्वारा लिखे पोस्टकार्ड प्रदर्शित हैं। यहां दिल्ली के हेमराज, रमा, अमित कुमार। जयपुर के विद्यासागर उपाध्याय, लखनऊ के जयकृष्ण अग्रवाल, राजस्थान के विनय कुमार, कार्टूनिस्ट मनोज वाजपेयी के पोस्टकार्ड है। जबकि नरेश सक्सेना, उर्मिल थपलियाल, सर्वेश अस्थाना, परितोष निगम,ममता त्रिपाठी, पुष्पेंद्र अस्थाना, बिकानेर के गोपाल ब्यास, त्रिलोच कालरा ने भी बड़े भावपूर्ण शब्दों में पोस्टकार्ड लिखे हैं।

भावुक पत्र
पुलवामा हमले से जुड़ा एक पोस्टकार्ड दर्शकों को भावुक कर देता है। यह पोस्टकार्ड दो दोस्तों की बातचीत है। जिसमें पुलवामा हमले के बाद एक दोस्त ने अपने सैनिक दोस्त से बातचीत लिखी है। इसमें लिखा है मेरा एक दोस्त है, बीएसएफ में, पुलवामा हमले के बाद उससे बात हुई थी। वो पं बंगाल में तैनात है। उसने कहा---
अभी गर्मी की छुट्टी में मिला था
परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त था
पर सच कहूं वो मस्त था
परिवार की सेवा में भी और देशसेवा में भी
एक बार फिर, मैं देखता रहा
और सुुनता रहा
सिर्फ सुनता रहा।

अभिनंदन का अभिनंदन
यहां करीब आधा दर्जन एेसे पोस्टकार्ड है जो अभिनंदन की वीरता की कहानियों, उनके वंदन से भरे पड़े हैं। कलाकारों समेत बच्चों ने अभिनंदन की कलाकृति भी बनाई है। एक पोस्टकार्ड पर अभिनंदन एवं विमान की कलाकृति है जबकि एक अन्य में अभिनंदन का हंसता मुस्कुराता चेहरा है। इसके बारे में पूछने पर क्यूरेटर कहते हैं कि सेना के जवान की खासियत यही है। वो भले ही लाख विपत्तियों में हो लेकिन हमेशा मुस्कुराता रहता है। वो दर्द को सहकर देशवासियों की सुरक्षा में तल्लीन रहता है।

विपत्ति में च्पुुलज्
एक पोस्टकार्ड में सेना के जवान को एक पुल के रुप में दिखाया गया है। जवान के उपर से छोटे बच्चे-बड़े-बुजुर्ग आदि गुजर रहे हैं। यह तस्वीर दर्शाती है कि कैसे जवान हर मुश्किल घड़ी में हमारा सहारा बना है। बाढ़ आयी हो या फिर आंधी-तुफान, डिजास्टर हो। जवान आम लोगों की मदद के लिए सामने आते हैं। एक पोस्टकार्ड में बाढ़ के दिनों में सेना के जवान की मदद करती कलाकृति भी है। जवान जाति-धर्म से उपर उठकर व्यक्ति को कंधे पर बिठाकर पार करा रहा है। जबकि खुद वो कमर तक पानी में डूबा है।

रुको-झुको नहीं तुम
जवानों के लिए कई कविताएं वाली पोस्टकार्ड भी है। ऐसे ही एक पोस्टकार्ड पर लिखा है कि--मिला है मौका दिखा दो दमखम
कस लो मुट्ठियां
वीरों की संतान हो
भारत की शान हो
राष्ट्र तुम्हारा रहा पुकार
धर्म तुम्हारा बना आधार
रुको नहीं तुम, झुको नहीं तुम
जबकि एक अन्य पोस्टकार्ड पर बच्ची उषा लिखती हैं कि --
मेरे भारत देश के जवानों
आप ने दिया है खून की कुर्बानी
उंचा रहे आपका ख्याल और विचार
मेरे प्यारे जवान भाईयों।।
यहां कई ऐसे भी पोस्टकार्ड भी है जिनमें जवानों को शेर जैसे दिखाया गया है। युद्ध के दौरान जवानों की जिंदगी समेत जवानों के शहीद होने पर भावुुक माहौल को भी दर्शाते पोस्टकार्ड है।

पहाड़ में पोस्टकार्ड
एक जवान के परिवार के माहौल से रूबरू कराता है पहाड़ में पोस्टकार्ड। जिसमें कविता के बहाने पारिवारिक स्थिति को बड़ी संजीदगी से बयां किया गया है। लिखा है-
पोस्टकार्ड पर प्रेम पत्र
नहीं लिखे जाते थे, पर
हर अक्षर एक प्रेम ग्रंथ था
पापा,पढ़ने के बाद देर तक सहलाते रहते
मां की छाती से तो छूटता ही नहीं था पोस्टकार्ड
मैं छोटा था
मुझे बहुत प्यार लगता पोस्टकार्ड।।
एक पोस्टकार्ड पर जंग में हंसी हंसी अपनी जान देने वाले जवानों को श्रृदांजलि दी है। एक पोस्टकार्ड में जिसमें जवान की प्रतीकात्मक कैप दिखाया गया है। जो खून से सना हुआ जरुर है लेकिन कमल के फूल में खिले हैं। बहराइच के जिला उद्यान अधिकारी ने तो बकायदा कविता लिखी है। जिसमें वो लिखते हैं कि
ओ सैनिक
रोके से तू कहां रुकेगा
शीश तेरा कट जाए फिर भी कहां झुुकेगा
तेरा गौरव अमर रहे मां, हम दिन चार रहे न रहे।।
वहीं कई ऐसे पोस्टकार्ड है जिस पर अंतरिक्ष, आकाश, जल और थल में मजबूत होती भारतीय सेना की तस्वीरें है।

एहसासों की गठरी सा पोस्टकार्ड
यह पोस्टकार्ड बहुत ही खास है। इसमें एक परिवार की भावनाएं छिपी है। लिखा है---उम्मीद है तुम कुशल पूर्वक होगे।
लाल, तुम वतन की सेवा करना।
यहां मां-बहना खुश है।
छुट्टी मिले तो कुछ समय के लिए घर आना
संग समय बिताना
बाकि तुम खुद समझदार हो। पत्र मिले तो जवाब देना।



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