Monday, August 12, 2019

जब नेहरू के आदेश पर बीजू पटनायक ने इंडोनेशिया में जबरिया उतार दी डैकोटा प्लेन

15 august 1947 congress conference 

देश आजादी की डोर में बंध रहा था। सन 1947 में पुराने किले की एशियन कांफ्रेंस को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने संबोधित किया। भारत कोकिला सरोजिनी नायडू ने उसकी अध्यक्षता की। अंग्रेजों ने भी किसी तरह की बाधा नहीं डाली। कांफ्रेंस का पूरा विचार, परिकल्पना नेहरू जी की थी। एशिया के उन सब देशों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आए थे जो अपने देश में ब्रिटिश, डच या फ्रांसीसी आततायी हुक्मरानों से जूझे थे। इससे भी पहले की स्वतंत्रता का तिरंगा भारतीय आकाश में लहराता नेहरु पूरी एशिया में नव जागरण का शंख फूंकना चाहते थे।
https://en.wikipedia.org/wiki/Jawaharlal_Nehru

 इस कार्यक्रम में एक बड़ी रोमांचक घटना घटी, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। दरअसल, इंडोनेशिया सैकड़ों वर्षों से डच कालोनी थी। हालैंड ने वहां के स्वतंत्रता संग्राम सेनिकों और सेनानियों को जेलों में बंद कर रखा था। प्रार्थना करने पर भी उन्होंने सुहार्तो को,जो उस समय स्वतंत्रता आंदोलन के सर्वोच्च नेता थे, भारत आने की इजाजत नहीं दी थी। कार्यक्रम स्थल पर तनाव था। तभी एक अप्रत्याशित घटना घटी। एक नवयुवक सामने आया। पंडित जी उसे अच्छी तरह जानते थे। वह नवयुवक था बीजू पटनायक। जी हां, आज उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पिता बीजू एक दक्ष पायलट थे। उन्होंने नेहरू जी से कहा कि यदि आप आज्ञा दें तो वह एक इंडियन डैकोटा प्लेन में जाकर सुहार्तो और उनके एक दे साथियों को उसी प्लेन में जेल से उड़ाकर ले आएंगे। इतना दुस्साहस, इतना आत्मविश्वास जो दुनिया भर में फैले डच साम्राज्य को ललकारने को तैयार था। आज्ञा मिली, और वह हो गया जिसकी डच शासको ने भी कल्पना नहीं की थी। इंडोनेशिया(शायद जकार्ता) की जेल के खुले मैदान में बीजू का छोटा जहाज उतरा और सुहार्तो को ले उड़ा। डच अधिकारी तो बहुत ज्यादा सोच भी नहीं पाए। एंटी एयर क्राफ्ट तोपों ने जहाज को उड़ा देने के लिए पोजीशन ले ली थी। इशारे भर की देरी थी। लेकिन तभी नेहरू सरकार की चेतावनी डच अधिकारियों को सुनाई दी। उन्हाेने कहा कि यदि बीजू के जहाज को कुछ भी हुआ तो भारत के हवाइ अडडो पर खड़े डच विमान पायलट सहित या तो जब्त कर लिए जाएंगे या फिर उड़ा दिए जाएंगे। नेहरू उस समय वायसराय की अंतरिम सरकार के उपाध्यक्ष थे। फिर क्या था, बीजूू अपने जहाज संग दिल्ली आए और सुहार्तो कांफ्रेंस में शामिल हुए। हां, इस घटना के बाद दिल्ली में जब यह काफ्रेंस हुई तो कफ् र्यू लगा दिया गया।
#independenceday
#15august1947



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